Friday, April 15, 2016

Non-Residential Personality Devlopmentcamp at Howrah

Non-Residencial Personality Development Camp-Howrah-2016
Vivekananda Kendra Kanyakumari, Howrah Branch organised a 3 Days NRPDC  on 8th to 10th April for the children of std 5th_10th at Arihant Enclave, Howrah.
Overall 48 participants attended the Camp. The programme was concluded by Shri Rajesh Kohli, President of the Society. 
The Parents of the participants along with some other Committee Members were also present in the Concluding Session.
The 2 Groups of participants  performed a Play on Swamiji's life incident and the other group performed Suryanamaskar which they learned within three days of the Camp.  Another Group performed a beautiful Action Song.
The whole Camp was conducted by shri Umapad Mondal_sayonjak,  Howrah karya sthan, Ku.  Shubhangi Upadhyay, samskar Varg pramukh and Shri Pradeep Jayswal, Prant Vyavastha Pramukh.
The Committee of the Society has decided to continue such activities every week. So they have approached the Karyakartas of Vivekananda Kendra to start  "weekly Yoga Varga" for everyone as well as "Sanskar Varga" for the children of the Society.

देशभक्ति पर आधारित युवा प्रेरणा शिविर संपन्न

Yuva-Prerana-Shibir-Nagpur-2016
नागपुर, अप्रैल 12 : ‘देशभक्ति फिर जगे, देश का ये प्राण है’ इस थीम पर आधारित युवा प्रेरणा शिविर में तरुणों ने अपने विद्यार्थी जीवन में देश, समाज और परिवार में अपनी भूमिका को लेकर गहन विमर्श किया।
विवेकानन्द केंद्र कन्याकुमारी, शाखा नागपुर की ओर से आयोजित इस दो दिवसीय युवा प्रेरणा शिविर में 10, 11 और 12 के विद्यार्थी सम्मिलित थे। विशेष बात यह रही कि इस शिविर का संचालन और व्यवस्था युवाओं ने किया। शिविर के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विवेकानन्द केंद्र की नागपुर नगर प्रमुख सौ.गौरीताई खेर ने कहा कि जीवन को सही दिशा में ले जाने के लिए युवावस्था महत्वपूर्ण पड़ाव है। युवापन में ही बड़े से बड़े संकटों से लड़ा जा सकता है। इसलिए युवावस्था में खूब मेहनत करना चाहिए।
इस शिविर में 4 बौद्धिक सत्र हुए। प्रथम सत्र ‘यह अपनी भारतमाता, सम्पूर्ण विश्व की माता’ इस विषय पर बोलते हुए भारत वाणी के सम्पादक तथा शिविर प्रमुख श्री लखेश्वर चंद्रवंशी ने बताया कि भारत विश्व की प्राचीनतम राष्ट्र है। भारत की संस्कृति, धर्म की अवधारणा और गौरवशाली अतीत को अनेक उदाहरणों के माध्यम से समझाते हुए लखेश ने कहा कि भारत पुण्यभूमि है, धर्म भूमि है, वीर भूमि है, वेद भूमि है। इसलिए वाल्मीकि से लेकर कालिदास, भारतेंदु से लेकर आज तक देश के जानेमाने कवि भारत की महिमा गाते हैं। उन्होंने कहा कि सम्राट भरत अपनी मातृभूमि को माता कहते थे। यही कारण है कि भरत की भूमि को भारतमाता के रूप में जाना जाता है और युगों से भारतमाता की जय का उद्घोष इस भूमि के लोग करते आए हैं। हम सभी उन्हीं के वंशज हैं इसलिए हम भी भारत को भारतमाता कहते हैं। क्रांतिकारियों ने भारतमाता को दुर्गास्वरूप मानते हुए अपने जीवन को राष्ट्र के लिए हंसते-हंसते अर्पित कर दिया था और आज भी हमारे सुरक्षाबल मातृभूमि के सजग प्रहरी बनकर सीमा पर प्राणों की बाजी लगाकर पहरा दे रहे हैं।
द्वितीय सत्र में केंद्र की जीवनव्रती कार्यकर्ता प्रियंवदाताई पांडे ने “राष्ट्रभक्त संन्यासी स्वामी विवेकानन्द” के जीवन और सन्देश को अनेक प्रसंगों के माध्यम से शिविरार्थियों के सम्मुख रखा। उन्होंने बताया कि स्वामी विवेकानन्द ने भारत के उत्थान को अपने जीवन का मिशन बनाया था। स्वामीजी ने जहां विश्व को भारत के गौरवमय संस्कृति और इतिहास से परिचित कराया, वहीं उन्होंने भारत में कोलम्बो से अल्मोड़ा तक भ्रमण करते हुए भारत की सुप्त चेतना को जगाया।
तीसरे बौद्धिक सत्र में नागपुर महानगर पालिका के सत्ता पक्ष नेता श्री दयाशंकर तिवारी ने देशभक्ति की आवश्यकता पर जोर दिया। ‘देशभक्ति फ़िर जगे, देश का ये प्राण है’ इस विषय पर बोलते हुए तिवारी ने कहा कि आज देश में भारतमाता की जय कहने को लेकर विवाद चल रहा है, यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने बताया कि हमारे शैक्षिक पाठ्यक्रम में देशभक्ति की प्रेरणा जगानेवाले पाठ नहीं होते, जिसके कारण अब की युवा पीढ़ी फूहड़ता में मजा लेने को मजबूर हैं। उन्होंने उधम सिंह, खुदीराम बोस, भगतसिंह, रामप्रसाद बिस्मिल और अशफ़ाक उल्ला खां के जीवन प्रसंगों को उल्लेख कर देशभक्ति के मर्म को समझाया।
शिविर का चौथा सत्र “देश की वर्त्तमान चुनौतियां और हमारी भूमिका” पर आधारित था। इस विषय पर बोलते हुए वरिष्ठ पत्रकार श्री विराग पाचपोर ने कहा कि हम बचपन से अपनी पाठशाला में नित्य रूप से प्रतिज्ञा करते हैं कि “भारत मेरा देश है।...” पर यह केवल रटा जाता है। यदि यह प्रतिज्ञा जीवन का संकल्प बन जाता तो जेएनयु जैसे शिक्षा संसथान में भारत की बर्बादी के नारे नहीं लगते। उन्होंने कहा कि सत्ता के लोभी लोग समझते हैं कि भारत का जन्म 1947 से हुआ है, जबकि भारत का इतिहास करोड़ों वर्ष पुराना है। पाचपोर ने कहा कि भारत के बारे में भारतीयों की अज्ञानता आज के सन्दर्भ में सबसे बड़ी चुनौती है। यह अज्ञानता देश के इतिहास को गलत ढंग से पढ़ाने के कारण हुआ।
शिविर में ‘विद्यार्थी जीवन और करियर’ को लेकर कार्यशाला का आयोजन किया गया। परसिस्टन्स कंपनी में बड़े पद पर कार्यरत श्री तुषार जोशी ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में मन के बंदर विद्यार्थी को लक्ष्य से भटकाता है। इसलिए मन को सही दिशा देने के लिए एकाग्रता और संकल्प की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का मजाक बनाकर विद्यार्थी गलत करते हैं। शिक्षकों के प्रति सम्मान और सहपाठी मित्रों में परस्पर सहयोग से ज्ञान बढ़ता है।
शिविर में योग, सूर्यनमस्कार, प्राणायाम के साथ ही दिनचर्या और मित्रता व जिम्मेदारी को लेकर शिविराथियों ने आपस में चर्चा की। शिविरार्थियों ने खेल सत्र के दौरान तितिक्षवर्धक, बलवर्धक, चापलातावर्धक तथा एकाग्रतावर्धक विविध मैदानी खेल का आनंद लिया। ‘भारत की विश्व को देन’ को लेकर मंथन किया। प्रेरणा से पुनरुत्थान सत्र में इनडोर गेम्स के साथ ही मदनलाल धींगरा-सावरकर प्रसंग तथा विवेकानन्द केंद्र के संस्थापक श्री एकनाथजी रानडे के जीवन पर आधारित वीडियो क्लिप दिखाया गया। इस सत्र में चंद्रशेखर आजाद के जीवन के प्रेरक प्रसंगों से युवाओं को अवगत कराया। शिविर में मदनलाल धींगरा-सावरकर प्रसंग और चंद्रशेखर आजाद पर आधारित नाटिका शिविरार्थियों ने प्रस्तुत किए। शिविर में कुल 16 तरुण तथा 6 युवा, ऐसे कुल 22 लोग सहभागी थे। शिविर की सफलता के लिए शिविर प्रमुख के साथ ही महेश गुप्ता, पंकज घटोड़े, वैभव जोशी, विपिन वैद्य, रोकेटसो माम, शोभाताई पितले, अरुणाताई देशपांडे आदि कार्यकर्ताओं ने महती भूमिका निभाई। 

जाग उठी है तरुणाई : इंदौर में युवा विमर्श

Yuva Vimarsh Indore 2016
इंदौर महानगर में “जाग उठी है तरुणाई” विषय पर युवा विमर्श का आयोजन हुआ. विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की इंदौर शाखा द्वारा आनंद मोहन माथुर सभागृह, इंदौर प्रेस क्लब में हुआ।
‘युवा विमर्श ‘- एक वैचारिक श्रुंखला गत वर्ष केंद्र के संस्थापक मा. एकनाथजी रानडे की जन्म शती पर्व भारतवर्ष में मनाई गई। कार्यक्रम में विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के अखिल भारतीय उपाध्यक्ष मा. निवेदिता रघुनाथ भिड़े का उद्बोधन रहा। कार्यक्रम में मा. भंवर सिंह राजपूत विशेष अतिथि  के रूप में उपस्थित थे। युवा विमर्श कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मा. निवेदिता दीदी ने अपने उद्बोधन में स्वामी विवेकानंद के विचारों पर प्रकाश डालते हुए निम्नलिखित बाते बताई।
  •     प्रदीप्त युवा मन ही राष्ट्र की जीवन रेखा है ।
  •     युवा स्वयं को शारीरिक एवं मानसिक रूप से झोक देता है ।
  •     युवा अतीत-भविष्य को जोड़ता है ।
  •     अतीत में ऐसा क्या जीवन रस है जिससे यह राष्ट्र हजारो वर्ष से जीवित है ।
  •     जो भी सपना जब तक पूरा नहीं होगा, तब तक रुकेंगे नहीं, यह सपना केवल युवाओ का ही हो सकता है ।
  •     परिस्थितियों से विचलित नहीं होना ही युवाओ का स्वभाव है ।
  •     परिस्थितियां कैसी भी हो, परन्तु बाह्य परिस्थितियों के शिकार नहीं हो ऐसा युवा जिस देश में है, उस राष्ट्र का कोई भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता ।
  •     प्रत्येक युवा को अपना ध्येय निर्धारित करना ही होगा ।
  •     जीवन ध्येय ही आत्म शक्ति को जोड़ता है, जिससे युवा किसी भी परिस्थितियों में विचलित नहीं होता है ।
  •     स्वामी विवेकानंद कहते थे, संपूर्ण विश्व ही परस्पर जुड़ा हैl इसलिए समाज को ही सत्य के अनुसार चलना चाहिए ।
  •     संपूर्ण विश्व के अस्तित्व का सत्य एकात्मता ही है । हमारे देश के युवाओ को जापान के युवाओ के जीवन ध्येय  को स्मरण करते हुए कार्य करना होगा. जापान के पास कोई संसाधन नहीं था, सिवाय प्रदीप्त युवा मन के ।
  •     मैं अकेला क्या कर सकता हूँ, यह नहीं बोलना बल्कि स्वामी विवेकानंद की जीवनी को आत्मसात करना ।
  •     जीवन निर्माण में लगने वाली उर्जा व्यर्थ कार्यो में न लगे यह स्व विवेक से ही कार्यरत हो ।
  •     जीवन का आनंद राष्ट्र की संस्कृति की ही देन है ।
  •     जीवन के ध्येय के साथ जीवन के मूल्य को भी समझना होगा ।
आज स्वामी विवेकानंद के विचारों को आत्मसात कर अपने जीवन में उतारने की आवश्यकता है और परिवार से यह सहज संभव होता है, दूसरा स्वामीजी स्वयं युवा थे और उनकी अधिक अपेक्षा युवाओं से थी अतः युवा विमर्श एक वैचारिक शृंखला इस कार्यक्रम के अंतर्गत युवाओं ने जुड़कर राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान देना है। कार्यक्रम में मा. निवेदिता दीदी ने युवाओ के प्रश्नों का समाधान किया I २५० की संख्या में २० महाविद्यालय से युवा, प्राचार्य तथा प्राध्यापक वर्ग व नगर के प्रबुद्ध जन कार्यक्रम में उपस्थित थे।

उत्तर पूर्वांचल को लेकर संवाद कार्यक्रम

मा. निवेदिता दीदी, उपाध्यक्ष विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के इंदौर नगर में विवेकानंद केंद्र ने उत्तर पूर्वांचल में चल रहे केंद्र कार्य  को लेकर इंदौर महानगर के युवा उद्यमी, डॉक्टर्स, वकील, जस्टिस, मातृशक्ति, चार्टर्ड एकाउंटेंट्स, शिक्षा क्षेत्र केेे शिक्षाविद को लेकर नए वनवासी क्षेत्र में केंद्र कार्य का प्रारंम इस विषय को लेकर एकत्रीकरण किया गया। मा. निवेदिता दीदी ने केंद्र कार्य का उत्तर पूर्वांचल में चल रहे कार्य का अनुभव बताते हुए आहवाहन किये की इंदौर नगर के लोग इस कार्य से जुड़कर राष्ट्र निर्माण के कार्य में सहयोग करे और ऐसे कार्य के लिए खुलकर एकत्रिक आये।

Workshop for Parents in Nagpur

Parents-workshop-in-nagpur-2016
Vivekananda Kendra Kanyakumari, Branch Nagpur had organised a parent workshop for the young parents of the students of Nursery, K.G.I,and K.G.II of "School of Scholars" on Saturday, the 2nd of April, 2016.
Fifty parents participated in the workshop. The topic of the workshop was "Spiritual ways to solve problems and handle children". The first session of the workshop started with lighting of lamp and prayer followed by a patriotic song "Nirmanoke pavan Yug me" sung by Sou. Mohini Deshpande. An interactive talk was made after the song by Sou Kshama Dabholkar. She stressed on how the early years are important in the development of children and how parents play an important  role in moulding the children into a good human being  and making them an asset for the family and Nation through quoting various examples
The second session began with Action song and games conducted by Sou. Monika Khare and Sou Nilima Ketkar followed by group discussion conducted by Sou. Archana Lapalkar. The young parents actively participated in the group discussion and enthusiastically presented their views through small skits. The summing up of the workshop was done by Sushri. Priyamvada Pande Vidarbha Vibhga Sanghathak. The workshop ended with shanti mantra.

New Anadalaya Started at Maladhara, Goalpada, Assam

New Anadalaya Started at Maladhara, Goalpada, AssamAlong with 108 Aanandalayas in tea garden area we have started working in 4 communities as follow up of Janajati sammelan held at kanyakumari in September 2015.

In Goalpada district Maladhara area of Rabhas saw formal  inauguration of 4 Aanandalayas on 3rd April. HIMAJYOTI RABHA RENUKA RABHA PHULUMONI RABHA AND  SHRUTIRANI RABHA are our 4 Acharyas who are working to start the work since 2 months.

Monday, April 4, 2016

From the True education to the limitations of Modern Science

This month’s newsletter brings you the extracts from our popular book “Samagra Vikas” – Development with a Human Face. Prelude to different topics in the book is written by our colleague Shri.N.Krishnamoorthi. He has used Tenali Raman as a Mascot who describes the real education.
In our happenings section, we have a series of training programmes for Fish Amino technology, which were sponsored by NRDC, New Delhi. Inauguration of Varma camp, having overwhelming response and students coming from Colleges for internship.
In the wisdom section, we have C.Douglas Lummis, an American lecturer writing on Equality, Wolfang Sachs, a famous German researcher giving Co-relation between Languages and Culture ad Claude Alvares, an environmentalist from Goa tells us about the limitation of Modern Science. You can download and read our newsletter here.
As informed earlier, we will be sending a separate newsletter on “Green Rameswaram” project describing the works of various partners and stakeholders. The role of VK-Nardep in Green Rameshwaram project is only of a catalyst.