Monday, April 20, 2015

Organisation : Vivekananda Kendra News

Eknathji : One Life One Mission

"We give out the thought to others when it inspires us and makes us restless for its execution. Those others if they are open and responsive, are inspired immediately. If not, at least after a period of close contacts and discussions, they are converted to our thought and they are prepared to carry out the programme indicated, to put the thought in concrete form. Thus, they become the followers of a mission."
Ma. Eknathji Ranade 

News Updates from Vivekananda Kendra :
  •  Medical traditions to Metamorphosis  : Read More
  • इंदौर में युवा सेवा प्रशिक्षण शिविर  : विस्तृत

  • Kashmiri Pandit Youth Sammelan at Kashmir  : Read More
  • Rural Development Programme March Month Activities : Read More
  • Free eye camp at Mysore : Read More
  • New Website launched -> Work in Kashmir : "Shri Ramkrishna Mahasamelan Ashram" :http://srma.vkendra.org : Read More
  • Tale of the Vivekananda Rock Memorial Kanyakumari : Read More
  • स्मारिका : एक जीवन - एक ध्येय विस्तृत
  • New Video upload : Vimarsha : National Security : Chanllenges and Response at Surat : View Now
Forth coming event  :
  • योग प्रतिमान प्रशिक्षण शिबिर पटना :  विस्तृत
  • नाशिक में 'मै विवेकानंद बोल रहा हुॅ' व्याख्यान:  विस्तृत
  • Vimarsha on Role of Technology in 'Make in India' by Vice Admiral Raman Puri (Former Chief of Integrated Service Command)  :  Watch Live

Registration open for Yoga Shiksha Shibir at  Kashmir & Kanyakumari


Camp
Language
Duration
Age
Contribution
Yoga Shiksha Shibir - KanyakumariEnglish5 - 19 May 201518 to 50 YearsRs.2,000/-
योग शिक्षा शिविर - कन्याकुमारी हिन्दी५ - १९ मई २०१५ १८ से ५० सालरु.२,०००/-
योग शिक्षा शिविर - कश्मीर हिन्दी१२ - २१ जुन  २०१५ १८ से ५० सालरु.३,०००/-

अधिक जानकारी के लिए कृपया http://www.vivekanandakendra.org/camps-kanyakumariएवं http://www.vivekanandakendra.org/camps-kashmirदेखे

  1. YogaFlipKart
  2. योग
  3. Surya Namaskar
  4. Rousing Call To Hindu Nation
  5. Story Of Vivekananda Rock Memorial
  6. India's Contribution to World Thought & Culture
  7. A Comparehensive Biography of Swami Vivekananda
  8. Sadhana Of Service
  9. Eknathji - a Biographical Sketch
  10. Expression of Chirstianity with a focus on India - SoftCover
  11. Expression of Chirstianity with a focus on India - HardCover


Mananeeya Eknathji Janma Shati Parva



  • सूर्य नमस्कार महायज्ञसूर्य नमस्कार महायज्ञसूर्य नमस्कार महायज्ञअपने किए हुए सूर्यनमस्कार कृपया सूर्यनमस्कार घड़ी पर अवश्य जोडे ।
Please add your SuryaNamaskar in SuryaNamaskar Clock.
Please register to the SuryaNamaskar clock and daily add how many SuryaNamaskar done by your or your group. 
The website has been started on Rashtra Chintan Diwas, a First day of Samartha Bharat Parva, and till now12,88,138Suryanamskars have been registered.
The site gives various statistics like how many SuryaNamaskar done Today, This Month, This Year, with details like Total SuryaNamaskar done, by No. of Person & No. of Group.  Please spread the world and regularly add your count in the site.


Friday, April 17, 2015

Free eye camp at mysore

As a part of Mananeeya Eknathji Janma Shati Parva, the founder of Vivekananda Kendra, a Free Eye Camp was organized at Vakkaligara Samudaya Bhavana, Bannur  Mysore Rural District on 23rd March 2015. Camp was organized in association with Mysore Race Club Eye Hospital. 78 patients and 21 patients were identified and cataract  operation done during the period.

SRI RAMANAVAMI CELEBRATION: On 28th March 2015, Sri Ramanavami celebrated at Kendra ingrand manner. Morning 8 o’clock Akhanda Sri Ramanama Japa started. 782 people took prasada. Evening Bhajan sandya organized. 

Thursday, April 16, 2015

Rural Development Programme March Month Activities

Kashmiri Pandit Youth Sammelan at Kashmir

The  first “Kashmiri Pandit Youth Sammelan” was organized by Vivekananda Kendra, Kanyakumari - Shree Rama Krishan Mahasammelan  Ashram (SRMA), Nagdandi Anantnag, Kashmir. The impressive largely attended meet of devotees particularly  hundreds  of Community Youth   working  in Valley  from Sheikhpora Budgam, Srinagar, Pulwama ,Monghama, Tumlahal, Drassu, Muran, Tahab , Ladeb, Koil, Hall, Shopian , Kulgam, Devsar, Aidgen, Vessu, Dialagam, Mattan, Saller , Wulrama, Akura, Laisar, Mahand , Khirhama, Charigam, Logripora, Lajura, Seer, Hutmurah , Anantnag , Uttrsoo,Nowgam, Pinglana ,Chandrigam, Bomzoi, Choudharigund  and other  areas was  warmly  addressed  by Mr. B.L.Bhat Chairman Administrative Committee, “SRMA”, Nagdandi. The Ashram  he  explained was  founded  by Swami Ashokanand Ji Maharaj  during 1937 to Preserve , Promote and Propagate “Sanatan Dharma”, the  basics  of  which  are Tolerance, non-violence, Humility, Pridelessness,Simplicity, Steadyness , Self control and cleanliness. He  advised  the  youth to remain united , get inspiration  from deeds  of great souls  like Swami Vivekananda, Mananyee Eknathji,and Swami Ashokanand Ji towards  fulfilling  the “Spiritually  Oriented Service Mission”  of Man Making  and Nation Building. Being  “Ambassadors and  Front Runners of  the  Community” working  under  all odds in valley he advised  them  to  additionally  work towards  revival  of  “Old Kashmiriyat” in close  cooperation  with the local majority community  youth who had  assembled  in large numbers along with other members  of  the local populase  to welcome  and  greet them. He requested the District Administration of Anantnag, Kulgam,Shopian, Pulwama, Budgam and other districts to  be responsive in mitigating  the problems  of the Kashmiri Pandits presently living in valley for provision of  basic  amenities viz. Sanitation , Electricity, water  and  essential  supplies besides proper  security as per  their  desired  requirements. The meeting  was  also  attended  by Mr. R.L.Teng, Mr P.N.Raina, R.L.Pandita, Mr.Satish Bhat, Mr. J.K.Razdan, Mr.B.K.Raina , Mr.M.K.Kak, Mr.Bal Ji Raina, Mr.Aditya Pandita, Mr.P.L.Raina, Mr.Girdhari Lal Bhan Senior VK Life workers  Mr. Atul Saha  and Kumari Lalita Ji who  thanked  the  youth  for participation and  remaining connected  to Roots. 

इंदौर में युवा सेवा प्रशिक्षण शिविर

विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा इंदौर की और से मा. एकनाथजी जन्म शती पर्व के अंतर्गत सफल युवा युवा भारत अभियान का युवा सेवा प्रशिक्षण शिविर दिनांक ९ अप्रैल से १२ अप्रैल २०१५ को इन्दौरे नगर में मानव सेवा ट्रस्ट में आयोजित किया गया। शिविर में चिंतन युवा सेवा के विषयों को लेकर किया गया।
शिविर में मा. एकनाथजी के गुणों को लेकर गण के नाम दिए गए थे – १. दृढ़ता, २. सातत्य, ३. निष्ठा, ४. संगठन।
शिविर की दिनचर्या सुबह जागरण से प्रारंभ होकर प्रार्थना, योग, परिसर स्वछता, बौद्धिक सत्र, गट चर्चा, प्रस्तुति, नैपुण्य वर्ग, गीत व मंत्र अभ्यास, शारीरिक अभ्यास, भजन संध्या, प्रेरणा से पुनरुत्थान कर हनुमान चालीसा का पाठ कर रात्रि समाप्त होती थी। प्रेरणा से पुनरुत्थान में मा. एकनाथजी का जीवन सभी शिविरार्थियो तक पहुचाया गया। शिविर के समापन सत्र में शिविर अधिकारी श्री शरदजी वाजपेयी व मानव सेवा ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री विष्णुजी गोयल उपस्थित थे, समापन में शिविर अधिकारीजी ने आव्हान किया की सेवा का पक्ष मातृभूमि के प्रति समर्पित होना होगा, जिससे राष्ट्र का निर्माण हो यही हमारा एकमेव भाव मन में रख कर सेवा करनी है। स्वामीजी का जीवन, मा एकनाथजी का जीवन यह सेवा कार्य का हमारा आधार हो।
शिविर में कुल ११ महाविद्यालय से ७० विद्यार्थिओं ने भाग लिए, जिसका संचालन कुल २० कार्यकर्ताओं ने किया।
बौद्धिक सत्र
सत्र १ 
१ स्वामी विवेकानंद की दृष्टी – हे भारत उठो जागो और अपनी आध्यात्मिकता से सारे विश्व को आप्लावित कर दो यह सत्र आ. विभाशजी उपाध्याय द्वारा लिया गया ...
 * स्वामी विवेकानंद का चित्र देखते ही लगता है की उनसे हमारा जन्म जन्मान्तर का सम्बन्ध है।
 * ईश्वर को देखने की इच्छा का अर्थ है ह्रदय की पवित्रता।
 * प्रत्यक्ष देखना याने दो आँखों से देखना, और दूसरा याने मन की आँखों से देखना।
 * भगवदप्राप्ति यह मनुष्य को प्राप्त ही करना है।
 * ठाकुरजी कहते है नरेन्द्र आया नही मै लेकर आया हु।
 * स्व का बोध न होने के कारण व आत्मा विस्मृती के कारण से राष्ट्र का पतन हुआ।
 * स्वामीजी का मूल मंत्र है व्यक्ति निर्माण और उसका अधिष्ठान है वेदांत।
 * भगवान का साक्षात्कार करने से पुनर्जन्म में आना जाना बंद हो जाता है।
 * अपनी बात को सही ठहराने का प्रयास करना याने अज्ञान।
 * स्वामीजी का पश्चिम में जाना यह विश्व में आध्यात्मिक जागरण का पुनः प्रारंभ है।
 * पश्चिम के चार तत्व जिसने मूल से हानि पहुचायी जिसको स्वामी विवेकानंद समज गए थे ,
   १ जो श्रेष्ठ है वह जीवित है।
   २ जीवन यह संघर्ष है – अपने को जीवित रहना है तो संघर्ष करो ,
   ३ प्रकृति मनुष्य के लिए बनायीं है जितना भोग कर सकते हो करो
   ४ मनाव अधिकार – अपने अधिकार की चिंता करना
    स्वामीजी ने इसके समाधान यह पश्चिम को बताये
   १ सर्वे भवन्तु सुखिनः ,
   २ संघर्ष होता ही नहीं है जो संघर्ष दिखता है वह माया है – सूर्य व बादल दिखने के लिए बादल है परन्तु उसके पीछे सूर्य है,
   ३ मनुष्य यह प्रकृति का अंग है न की वह प्रकृति का राजा  ,
   ४ कर्तव्य बोध
 * सत्य को जानने के लिए मन के परे जाना होगा उसका मार्ग है आध्यात्मिकता,
 * धर्म का प्रगटीकरण यह आध्यात्मिक आचरण का व्यवहारिक पक्ष है,
 * भीतर की शक्ति को जागृत कर बाहर प्रकट करो,
 * आत्मनो मोक्षार्थं जगत हितायच....
सत्र २
विवेकानंद केंद्र – विलक्षण व परिभाषा
आ. सुब्रतो गुहा
 * सृष्टि का प्रथम राष्ट्र होने का गौरव यह भारत को है।
 * जो अपने क्षेत्र में ईमानदारी व निष्ठा से कार्य करता है उनसे ही ईश्वर प्रसन्न होते है और मिलते है।
 * सामान्य से असामान्य बनाने के लिए एक दृढ़ इच्छा शक्ति की आवश्यकता होती है। मा. एकनाथजी का जीवन।
सत्र ३
सेवा की संकल्पना – आध्यात्मिक सेवा
आ. विकासजी दवे
* स्वामीजी ने हमेशा सेवा का ही आग्रह किया।
* सेवा भाव के लिए सम्पूर्ण सृष्टि से एकाकार होना आवश्यक है।
  उदा . ठाकुरजी – गाय को मार रहे है परन्तु दर्द ठाकुरजी को हो रहा है ....(सिया राम मय सब जग जानी)
* सेवा की उत्पत्ति यह आत्मीयता से निर्माण होती है | सेवा में बाधाये आती है परन्तु आत्मीयता होने से वह दूर होती है।
* पुण्य केवल सेवा से ही प्राप्त होता है।
* वास्तव में सेवा वृत्ति सभी में होती है।
* अपने आप को जलाने वाले ही प्रकाश दे सकते है।
* सेवा करते समय अहंकार का भाव नही आने देना।
* सेवा याने सभी के प्रति ह्रदय में अनुभूति।
* सेवा का आग्रह स्वयं से करे।
* सेवा का भाव आचरण से स्पष्ट होना चाहिए।
* जिनका जीवन सेवा से परिपूर्ण है उनके जीवन को पढ़े।
* अन्यों की वेदना ही मेरी वेदना बने यही सेवा की संकल्पना है।
* सेवा करते समय हमेशा हमारी गर्दन निचे होनी चाहिए।
सत्र ४
सेवा कार्य के परिणाम – जो दिखते नही समजने पढ़ते है
आ. नंदनजी जोशी
* मोक्ष की व्याख्या सेवा से प्रारंभ होता है।
* निस्वार्थ सेवा का परिणाम – शिलास्मार्क तीर्थ क्षेत्र।
* निस्वार्थ से याने अपने ही पास के लोगों की सेवा करना।
* स्वार्थ पूर्ण सेवा यह क्षणिक होती है।

Vimarsh at Teju

The Teju Branch of Vivekananda Kendra Arun Jyoti is organized Vimarsha (A dialogue for Creative Leaders). The topic was “SERVE MEN SERVE GOD”. Programme begin with lightening the lamp by Vivekananda Kendra Arunachal Prant Pramukh Dr. Joram Begi and welcome speech given by Vyavstha Pramukh Smt.Hage behizane, Nagara Pramukh VKAJ Tezu Shri Kruleso Ngadong highlighted the work of Vivekananda Kendra in Arunachal, Shri P.K. Pandey highlighted the message of Swamiji. Dr. Joram Begi said that every person has the divinity , we should serve the man those who are poor, Illiterate, Ignorant and innocent, Serve to these people mean  worship to god, he emphases worship should be selfless, One should not expect by giving only think to give. Serve should be irrespective of cost, color and religious. As a good citizen one should be dedicated and communicated to their duty that is their service to god. End of the Program VKAJ Teju Nidhi Sankalan Pramukh Smt. Reena Sharma given the vote of thanks.

Medical traditions to Metamorphosis

This month in our newsletter you can see how the local traditions can be revived for the protection of the bio-diversity and social coherence. What we have presented are excerpts from our publication, published as part of 'Green Rameshwaram' and the UNICEF WaSH initiative. They are also part of the panels in the awareness creation exhibition conducted at  various places in the island of Rameshwaram. In our 'Happenings' we have Azolla workshop, workshops on indigenous Varma-Bone setting techniques, Bio-methanation plant training and awareness camps. In the ethnic medicine workshop a documentation CD of the Varma techniques was released. In Green Rameshwaram we have college students from Kanyakumari district coming and participating in the cleaning campaign. In the publication we have excerpt from Samagra Vikas which is about management of the urban waste through recycling of the organic matter. It is an excerpt from the article by Gary Gardner on recycling of organic wastes.

It is really inspiring to see college students getting down to earth and clean the traditional water bodies of Rameshwaram in the spirit of service and cleaning mission. Green Rameshwaram is now going with much interest from beyond the boundaries of the island itself. >From the installation of bio-methanation plants to produce both energy efficiency as well as solid waste management to the awareness camps and green health camps to the cleaning mission, the island is now slowly but surely waking up to the idea of clean India.

In the wisdom section we have biologist and educationist Lewis Thomas talk about the living planet. Claude Alvares the famous eco-activist from Goa talks about how living traditions are important for a sustainable living. Science writer Shawn Radclif speaks takes one from the reality of biological metamorphosis to the spiritual: … While dissecting a caterpillar, a 17th century Dutch biologist discovered that early versions of the future butterfly—such as the wings, antennae, and legs—already exist in the caterpillar’s body before the formation of the chrysalis. …So caterpillars already carry parts of their future selves inside, and the potential for transformation exists even before it is visible from the outside. Isn’t that amazing?!