Friday, April 7, 2017

पटना में योगसत्र

विवेकानन्द केंद्र कन्याकुमारी शाखा ,पटना द्वारा पशु चिकित्सा महाविद्यालय के छात्रावास सर्वप्रथम भाइयों के छात्रवास में 20 मार्च से 26 मार्च तक योग सत्र का आयोजन किया गया इस योग सत्र का विशेष उद्देश्य योग की महता को युवाओं तक पहुँचाना साथ ही साथ योग का विद्यार्थी जीवन में क्या महत्त्व है इसको समझाना हमने उनको शारीरक अभ्यास के साथ साथ ये भी बताया की जीवन में हमने जितना ग्रहण किया है उस से ज्यादा समाज को वापिस देना और बताया की ये यज्ञ की संकल्पना यदि रूक गई तो समाज दुर्भल होता जायेगा और व्यक्ति समाज में समस्या के रूप में खड़ा हो जायेगा इसलिए इस संकल्पना को आगे बढ़ाना ।

योग सत्र के समापन में महाविद्यालय के DEAN डॉ. समन्तराय जी ने युवाओं को इसे नियमित करने के लिए आव्हान किया और कहा की व्यक्तित्व विकास शिविर भी अपने महाविद्यालय आयोजित करवायेंगे , केंद्र के सहा नगर प्रमुख डॉ. पंकज कुमार जी ने केंद्र की गतिविधियों पर प्रकाश डाला साथ ही केन्द्र से नियमित जुड़कर इस राष्ट्र कार्य में अपना योगदान  देने के लिये आव्हान किया ।

27 मार्च से 2 अप्रैल बहिनों के छात्रावास में योग सत्र का आयोजन किया उस योग सत्र का समापन में केंद्र की कार्यालय प्रमुख  श्रीमती सुभाषिनी द्विवेदी  जी ने केन्द्र कार्य से जुड़ने के साथ साथ बहिनों को अपनी भूमिका निभाने की लिये कहा और उन्होंने बताया की ये योग हमारे समूर्ण जीवन को बदल देगा और आने वाली नई पीढ़ी संभल और सकारात्मक होगी  उन्होंने इसे नियमित करने के लिये भी आव्हान किया ।

Monday, April 3, 2017

योग का प्रथम अध्याय है अनुसाशन

21 फरवरी से 2 मार्च 2017 तक दस दिवसीय योग शिविर का बिहार - पटना में किया गया। इस योग शिविर में उपस्थित प्रतिभागियों को शिथलीकरण, सूर्यनमस्कार ,और आसन ,प्राणायाम के अभ्यास के  साथ- साथ पतंजलि ऋषि के आठ सूत्र यम, नियम ,आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार ,धारणा, ध्यान,और समाधी के बारे में बताया गया किस प्रकार ये हमारे जीवन से जुड़े हुए है साथ ही इनका हमारे जीवन में कितना महत्त्व है ये बताया गया। इस शिविर में 21 प्रतिभागियों की उपस्थिति रही।

शिविर के समापन में श्री किशोर टोकेकर ( सयुंक्त महासचिव विवेकानन्द केंद्र ) उपस्थित रहे उन्होंने योग सत्र के समापन में मार्गदर्शन करते हुए बताया की योग  वह विधि है जिसमें मनुष्य पशु-मानव के स्तर से विकास करता हुआ मानव-मानव,अति-मानव और उससे आगे दिव्य-मानव के पद की ओर अग्रसर होता है आगे उन्होंने बताया की वैयक्तिक उपलब्धियों तथा सामाजिक समरसता की प्राप्ति हेतु योग,स्पष्टत:,एक वास्तविक समाधान है।

मुकेश कीर (प्रान्त संगठक बिहार+झारखण्ड) द्वारा विवेकानन्द केन्द्र की विभिन्न गतिविधियों पर प्रकाश डाला गया साथ ही उन्होंने केंद्र से जुड़कर इस राष्ट्र यज्ञं में अपना योगदान देने के लिए आह्वान किया।

स्थानीक कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर, खंडवा नगर

विवेकानन्द केंद्र कन्याकुमारी इंदौर विभाग द्वारा खंडवा नगर में स्थानिक कार्यकता प्रशिक्षण शिविर दिनांक 22 मार्च से 26 तक आयोजित किया गया। कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर यह कार्यकर्ता के वैचारिक स्पष्टता तथा राष्ट्र निर्माण में कार्यकर्ता की भूमिका इन विषयों को लेकर आयोजित किया जाता है।

शिविर में कुल 6 बौद्धिक सत्र हुए, 1.राष्ट्र भक्त सन्यासी स्वामी विवेकानंद , 2. केंद्र प्रार्थना, 3. संघटित कार्य की आवश्यकता  4. मा. एकनाथजी, 5. संस्कार वर्ग क्यों और कैसे 6. गुण एवं जीवन ध्येय। शिविर में दिनचर्या सुबह 4.30 बजे जागरण व प्रातः स्मरण से प्रारम्भ कर संस्कार वर्ग का अभ्यास, कर्म योग श्लोक संग्रह का अभ्यास व पठन किया गया। मंथन सत्र में सेवा ही साधन से सुव्यवास्थित मानसिकता  अध्याय का पठन, संस्कार वर्ग से वर्त्तमान चुनोतिया का समाधान इन विषय पर चर्चा व प्रस्तुति की गयी। अभ्यास सत्र में उठो जागो अभियान, महाविद्यालय में केंद्र वर्ग एवं उत्सव के विषय कार्यकर्ता ने लिए। शाम शारीरिक अभ्यास में संस्कार वर्ग लिया गया। प्रेरणा से पुनरुत्थान में भगिनी निवेदिता की कहानी बताई गयी।

शिविर में समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ के मा. प्रान्त सह संघचालकजी डॉ प्रकाश शास्त्री, खंडवा शासकीय बहुशिल्प महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ चंद्रशेखर ढबू और विवेकानंद केंद्र की प्रान्त संघटक कु. रचना दीदी  ने कार्यकर्ताओं को आशीर्वचन दिए। डॉ शास्त्रीजी ने बताया की संगठन में नेतृत्व करने वाला कार्यकरता स्पष्ट और व्यवस्थित है तो कार्य यह परिणामकारक होता है, डॉ चंद्रशेखर ढबू जी ने स्वयं पर नियंत्रण करने की बात कही, आ. रचना दीदी ने कार्यकरताओ को आहवाहन किया की यह समय अधिक कार्य करने का है अतः अपने जीवन का अधिक से अधिक समय हम दे । समापन कार्यक्रम में खंडवा नगर से प्रबुद्धजन भी उपस्थित थे। शिविर के अंतिम दिन कार्यकर्ताओं ने श्री दादाजी धूनीवाले के दर्शन किये और प्रसादी ग्रहण की ।

शिविर में कुल 4 गण त्याग, सेवा, समर्पण,श्रद्धा की रचना की गयी थी। शिविर में इंदौर नगर से 16, धार नगर से 3 और उज्जैन नगर से 9 , खंडवा नगर से 2 , संचालन चमु 10 ऐसे कुल 40 कार्यकर्ता उपस्थित थे।

Cyclic Meditation Camp at Chinchwad

Chinchwad branch had organized a 4 day Cyclic meditation camp from 20/03/2017 to 23/03/2017 at Dhokha Pratishthan Chinchwad which was conducted by Shri Vishwasji. We had an overwhelming response for this program and over 150 people attended all 4 days regularly. ​The good comments from the people and desire of some participants to join our organization means a lot to us.

We are now in touch with the Police department here to give them a training session on Cyclic meditation looking at their busy stressful life full of tension.

W​e would ​like to thank all the karyakartas for helping and making this program a big success. Also we would like to thank Mr. and Mrs. Dhoka for arranging a big hall for this session free of cost.

Friday, March 24, 2017

Conference on Swami Vivekananda

एसडी पीजी कॉलेज में “स्वामी विवेकानंद: द वाइस ऑफ़ यूथ” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का सारगर्भित समापन
आज की गतिविधियाँ: भाषण, खेल, प्रेजेंटेशन, डिस्कशन

उच्चतर शिक्षा विभाग द्वारा प्रायोजित दो दिवसीय नेशनल कोन्फेरेंस का एसडी पीजी कॉलेज में आज विधिवत एवं सारगर्भित समापन हो गया. “स्वामी विवेकानंद: द वाइस ऑफ़ यूथ” थीम लिए इस सेमिनार ने प्रदेश के सुदूर कोनो से आये विवेकानंद विद्वानों और रिसर्च स्कोलर्ज को अपनी तरफ खिंचा. दूसरे दिन के मुख्य वक्ता श्री अशोक बत्रा, प्राचार्य हिन्दू कॉलेज रोहतक और श्री दशरथ चौहान, विभाग प्रमुख विवेकानंद केंद्र हरियाणा प्रान्त रहे. सुश्री अलका गौरी जोशी, प्रान्त संगठक विवेकानंद केंद्र हरियाणा प्रान्त ने प्रतिभागियों और रिसर्च स्कोलर्ज को खेल, प्रेजेंटेशन और डिस्कशन के माध्यम से व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया तथा उन्हें खुद से आत्मसात किया. प्रदेश के भिन्न-भिन्न कालेजो से आये रिसर्च सकोलर्स और प्राध्यापको ने भी आज की कार्यशाला में भाग लेकर स्वामी विवेकानंद के बताये मार्ग पर चलने का प्रण लिया. सिरसा, कैथल, पंचकुला, अम्बाला आदि से आये रिसर्च सकोलर्स ने इस दो दिवसीय कोन्फेरेंस में स्वामी विवेकानंद पर लिखे अपने शोध पत्र भी प्रस्तुत किये.

मुख्य वक्ता श्री अशोक बत्रा, प्राचार्य हिन्दू कॉलेज रोहतक ने अपने वक्तव्य में स्वामी विवेकानंद द्वारा विश्व धर्म सम्मलेन में दिए गए भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि उनके द्वारा बोले गए शब्द उन्हें आज भी याद है, “मेरे अमेरिकी बहनों और भाइयों, आपके इस स्नेह्पूर्ण और जोरदार स्वागत से मेरा हृदय आपार हर्ष से भर गया है। मैं आपको दुनिया के सबसे पौराणिक भिक्षुओं की तरफ से धन्यवाद् देता हूँ”. श्री बत्रा ने कहा कि दुनिया को शहनशीलता और सार्वभौमिक स्वीकृति का जो पाठ विवेकानंद ने पढाया है वह दुर्लभ है. शब्दों का चुनाव कैसे हो, और कैसे एक-एक शब्द हमारा पूरा व्यक्तित्व ही बदल सकता है यह सन्देश हमें स्वामीजी ने ही समझाया है. श्री बत्रा ने आज इस अवसर का लाभ उठाते हुए उपस्थित प्रतिभागियों को लिखने कि कला और शब्दों कि ताकत के बारे में विस्तार से समझाया.

सुश्री अलका गौरी जोशी ने कहा की आज की भाग-दौड़ की जिंदगी में किसी के पास भी इतना समय नहीं है के वह आत्म-चिंतन और गंभीर मंथन कर सके। मानसिक-अवसादों के कारण हमारा व्यक्तित्व और स्वास्थ्य दिन प्रतिदिन गिर रहा है। ऐसे में आत्मिक संतुष्टि और संतुलन के लिए विवेकानंद विचारों को हमें अपनाना चाहिए। जब बाहरी शोर हमें सुनना बंद हो जाएगा तभी हमें मन की आवाज़ सुनाई देगी. तत्पश्चात खेल, प्रेजेंटेशन और डिस्कशन के सत्र में सुश्री अलका गौरी जोशी, प्रान्त संगठक विवेकानंद केंद्र हरियाणा प्रान्त ने प्रतिभागियों के भीतर छिपी प्रतिभा और उर्जा को कैसे नियंत्रित किया जाए के बारे बखूबी प्रशिक्षण किया. इस सत्र में सोने के समय का ध्यान लगाने में कैसे उपयोग किया जाये, तरक्की और आध्यात्म में सामंजस्य कैसे स्थापित किया जाये, धर्म का अध्ययन कैसे हो, प्रश्न पूछने से पहले कैसे ज्ञान प्राप्त किया जाये, क्या ध्यान सिर्फ एकांत में ही संभव है जैसे कितने ही अलग-अलग विषयों पर सकोलर्स और प्रतिभागी छात्र-छात्राओं को व्यवहारिक ज्ञान और प्रशिक्षण दिया गया. प्राणायाम, योग तथा स्वाध्याय का व्यावहारिक ज्ञान भी इसी सत्र में दिया गया। सुश्री अलका गौरी जोशी ध्यान लगाने की प्रक्रिया को भी स्वयं कर के समझाया।

अपने सारगर्भित और ओजस भाषण में श्री दशरथ चौहान, विभाग प्रमुख विवेकानंद केंद्र हरियाणा प्रान्त ने आज स्वामी विवेकानंद के जीवन, शिक्षाओं और महान विचारों पर आधारित कहानियां और रोचक एवं शिक्षापूर्ण घटनाएं प्रतिभागियों को सुनाई। इन कथाओं को सुनाने का तात्पर्य नौजवानों में नया जोश और प्रेरणा भरना था. हममे दान की प्रवृति को खुद में सैदेव रखना चाहिए. जीवन में रिश्तों कि भी बहुत अहमियत है. एकाग्रता रखने वाला व्यक्ति जीवन में कभी असफलता का मुख नहीं देखता. गुलाम रहने वाले लोगों का कोई धर्म नहीं होता. उन्होनें कहा की जब तक विवेकानंद की दी गई शिक्षा हमारे मन-मस्तिष्क में रच-बस नहीं जाती तब तक पारंपरिक शिक्षा ग्रहण करने का कोई औचित्य नहीं है। हमें अपनी इंद्रियों की लगाम को काबू में रखना आना चाहिए और ‘अहं’ को काबू रखना भी हमने ही सीखना है. कामनाओं और इच्छाओं को नियंत्रण में रख कर ही हम जीवन में सही निर्णय ले सकते है। जीवन में किसी ना किसी लक्ष्य को निर्धारित करना बहुत जरूरी है और फिर उन लक्ष्यों को पाने का तरीका भी उचित होना चाहिए. हमारे मन सैदेव सुविचार ही आने चाहिए। स्वामी विवेकानंद के विचारों में जीवन जीने की कला और शक्ति व्याप्त है। स्वामीजी को पढ़ने से खुद में शक्ति और आत्मविश्वास का नव संचार होता है। स्वामी विवेकानंद से बड़ा कोई पथ प्रदर्शक नहीं है। स्वामीजी कहते थे की यदि हमने परमपिता परमात्मा की सेवा करनी है तो पहले देश की सेवा करनी होगी. हर व्यक्ति में एक जैसा ही प्रकाश-पुंज मौजूद होता है, बस उसे पहचानना आना चाहिए. स्वामीजी ने इसी प्रकाश-पुंज कुंज को जानने में हमारी मदद की है। उन्होनें कहा की आज़ादी के सही मायने ज़िम्मेदारी के साथ आते है।

----------------------(आज सुनाई गई विवेकानंद कहानियां)------------------

विवेकानंद की कहानियां सुनते हुए श्री दशरथ चौहान ने प्रतिभागीओं को मन्त्र-मुग्ध कर दिया. एक बार स्वामी विवेकानंद के विदेशी मित्र ने उनके गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस से मिलने का आग्रह किया और कहा की वह उस महान व्यक्ति से मिलना चाहता है जिसने आप जैसे महान व्यक्तित्व का निर्माण किया. जब स्वामी विवेकानंद ने उस मित्र को अपने गुरु से मिलवाया तो वह मित्र, स्वामी रामकृष्ण परमहंस के पहनावे को देखकर आश्चर्यचकित हो गया और कहा – “यह व्यक्ति आपका गुरु कैसे हो सकता है, इनको तो कपड़े पहनने का भी ढंग नहीं है.” तो स्वामी विवेकानंद ने बड़ी विनम्रता से कहा – “मित्र आपके देश में चरित्र का निर्माण एक दर्जी करता है, लेकिन हमारे देश में चरित्र का निर्माण आचार-विचार करते है.”

श्री दशरथ चौहान ने एक और कहानी सुनाते हुए कहा की स्वामी विवेकानंद बचपन से ही निडर थे.
जब वह लगभग 8 साल के थे तभी से अपने एक मित्र के यहाँ खेलने जाया करते थे.उस मित्र के घर में एक चम्पक पेड़ लगा हुआ था.वह स्वामीजी का पसंदीदा पेड़ था और उन्हें उसपर लटक कर खेलना बहुत प्रिय था. रोज की तरह एक दिन वह उसी पेड़ को पकड़ कर झूल रहे थे की तभी मित्र के दादा जी उनके पास पहुंचे,उन्हें डर था कि कहीं स्वामीजी उस पर से गिर न जाए या कहीं पेड़ की डाल ही ना टूट जाए, इसलिए उन्होंने स्वामी जी को समझाते हुए कहा, “नरेन्द्र,तुम इस पेड़ से दूर रहो, और अब दुबारा इस पर मत चढना.”
“क्यों?” नरेन्द्र ने पूछा.
“क्योंकि इस पेड़ पर एक ब्रह्म्दैत्य रहता है.वो रात में सफ़ेद कपडे पहने घूमता है, और देखने में बड़ा ही भयानक है.” उत्तर आया.
नरेन्द्र को ये सब सुनकर थोडा अचरज हुआ, उसने दादा जी से दैत्य के बारे में और भी कुछ बताने का आग्रह किया.
दादा जी बोले, “वह पेड़ पर चढ़ने वाले लोगों की गर्दन तोड़ देता है.” नरेन्द्र ने ये सब ध्यान से सुना और बिना कुछ कहे आगे बढ़ गए . दादा जी भी मुस्कुराते हुए आगे बढ़ गए, उन्हें लगा कि बच्चा डर गया है. पर जैसे ही वे कुछ आगे बढे नरेन्द्र पुनः पेड़ पर चढ़ गया और डाल पर झूलने लगा.
यह देख मित्र जोर से चीखा, “अरे तुमने दादा जी की बात नहीं सुनी, वो दैत्य तुम्हारी गर्दन तोड़ देगा.”
बालक नरेन्द्र जोर से हंसा और बोला, “मित्र डरो मत! तुम भी कितने भोले हो! सिर्फ इसलिए कि किसी ने तुमसे कुछ कहा है. ऐसे कभी यकीन मत करो;खुद ही सोचो,अगर दादा जी की बात सच होती तो मेरी गर्दन कब की टूट चुकी होती.” इतने निडर और साहसी थे स्वामी विवेकानंद. ऐसे कितने ही किस्से आज श्री दशरथ चौहान ने प्रतिभागियों को सुनाये.

प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने अपने वक्तव्य में कहा की दुनिया में आज एक प्रकार की खंडता हो गई है और इंसान-इंसान से दूर हो गया है. स्वामी विवेकानंद के विचार इसी खण्डता के भावों को दूर करते है और लोगों में छुपी दिव्य ज्योति को उनसे रुबरु कराते है। जिन समस्याओं से आज हम जूझ रहे है यदि हम थोड़ा सा भी स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं एवं उनके विचारों को अपना ले तो ये समस्याएँ खुद-ब-खुद छू-मंतर हो जाएंगी।

इससे पहले माननीय मेहमानों का स्वागत एसडी पीजी कॉलेज प्रधान श्री दिनेश गोयल, प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, डॉ रवि बाला और डॉ बाल किशन शर्मा ने किया. डॉ संगीता गुप्ता ने मंच का संचालन किया. प्रो यशोदा अग्रवाल ने आज प्रतिभागियो को विवेकानंद देश भक्ति गीत “धर्म के लिए जिए, समाज के लिए जिए; ये धड़कने ये सांस हो मात्रभूमि के लिए” गाकर सुनाया और सिखाया जिससे कोन्फेरेंस का माहौल देशभक्ति के भावो से औत-प्रौत हो गया।

इस अवसर पर कॉलेज के स्टाफ सदस्य डॉo सुरेन्द्र कुमार वर्मा, डॉo रवि बाला, डॉo राकेश गर्ग, प्रोo मयंक अरोड़ा, प्रोo इंदु पूनिया, प्रो यशोदा अग्रवाल, दीपक मित्तल आदि भी मौजूद रहे।

(प्राचार्य)
डॉ अनुपम अरोड़ा